भव्य धार्मिक आयोजन: नरसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज के सानिध्य में तिलधार यमकेश्वर में Hindu नववर्ष का स्वागत
भव्य धार्मिक आयोजन: नरसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज के सानिध्य में तिलधार यमकेश्वर में Hindu नववर्ष का स्वागत
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल, भजन-कीर्तन और भंडारे से भक्तिमय हुआ वातावरण
कम शब्दों में कहें तो, तिलधार (यमकेश्वर) में हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई। यह समारोह 16 मार्च को नरसिंह पीठ के सानिध्य में हुआ, जहां नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
विकासखंड यमकेश्वर के तिलधार क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजीव चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख यमकेश्वर सीता चौहान, जिला पंचायत सदस्य और गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई और इसके बाद भजन-कीर्तन व सत्संग का आयोजन किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में एक भक्तिमय वातावरण बना। कार्यक्रम का संचालन नीरज कुकरेती ने किया।
आशीर्वचन और संदेश
स्वामी रसिक महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि हिंदू नववर्ष भारतीय सनातन संस्कृति की एक पहचान है। उन्होंने समुदाय को अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने की आवश्यकता को बताया और यह भी कहा कि धर्म, संस्कार और आपसी एकता की आज के समय में बेहद आवश्यकता है।
स्वामी महाराज ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को एकता और समाज के उत्थान की प्रेरणा दी। उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और विकास की कामना भी की। इन शुभकामनाओं से श्रद्धालुओं का मनोबल और भी बढ़ गया।
भंडारे का आयोजन
कार्यक्रम के समापन पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया। इस भव्य आयोजन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भारी संख्या ने भाग लिया, जो इसे और भी सफल और भव्य बना दिया।
आयोजक संजीव चौहान ने कहा कि यह हिंदू नववर्ष का आयोजन अब हर वर्ष किया जाएगा ताकि क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को और सशक्त बनाया जा सके। इस प्रकार के आयोजनों से समुदाय में एकता बढ़ाने और धार्मिक जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक होते हैं, बल्कि एकता और सामंजस्य का भी परिचायक हैं। ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने में बेहद सहायक होते हैं।
भव्य धार्मिक आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक था, बल्कि यह हमारे समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रगाढ़ता से प्रस्तुत करता है।
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लेखिका: अनुराधा गुप्ता, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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