महिला अधिवक्ता के उत्पीड़न के मामले में केशव थलवाल पर गंभीर आरोप और मुकदमा दर्ज
महिला अधिवक्ता के उत्पीड़न के मामले में केशव थलवाल पर गंभीर आरोप और मुकदमा दर्ज
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कम शब्दों में कहें तो, एक महिला अधिवक्ता ने चर्चित केशव थलवाल के खिलाफ मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न की शिकायत की है, जिसके तहत पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
नया मोड़- मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का आरोप
अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून। एक बार फिर चर्चित केशव थलवाल प्रकरण ने एक नया मोड़ ले लिया है। कोतवाली नगर पुलिस ने एक विशेष रूप से सक्षम (स्पेशली एबल्ड) महिला अधिवक्ता की शिकायत पर केशव थलवाल के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोप में मानसिक, आर्थिक और सामाजिक उत्पीड़न शामिल है। बताया जा रहा है कि यह मुकदमा 18 मई को दून में दर्ज किया गया।
महिला अधिवक्ता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में यह खुलासा किया गया है कि उसकी पहचान "जागो उत्तराखण्ड" नामक फेसबुक पेज के माध्यम से केशव थलवाल से हुई थी। आरोपी ने खुद को पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर बताकर महिला का विश्वास जीता और भावनात्मक रूप से उसे समर्थन दिया। इस दौरान उसने महिला से कई बार धनराशि भी ली।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने अपनी रकम वापस मांगी, तो थलवाल ने संपत्ति लौटाने से इनकार कर दिया। यहाँ तक कि उसने महिला की निजी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी भी दी। इसके तहत महिला को बदनाम करने का प्रयास किया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने परिचितों के बीच उसे अपनी गर्लफ्रेंड बताकर शादी के लिए दबाव बनाया। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर झूठे वीडियो साझा कर और आत्महत्या की धमकी देकर उसे प्रताड़ित किया गया।
महिला द्वारा पेश की गई शिकायत में कहा गया कि 3 मई 2026 को उसे एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें कॉलर ने स्वयं को त्रिलोक नकोटी बताकर कहा कि केशव थलवाल ने आत्महत्या का प्रयास किया है और उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। कॉलर ने महिला पर प्रस्तावित शादी के लिए दबाव डाला, और नहीं मानने पर सामाजिक बदनामी की धमकी भी दी।
पुलिस ने महिला की तहरीर के आधार पर कोतवाली नगर में मामला संख्या 183/2026 धारा 318(2), 351(3) और 78 बीएनएस के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले केशव थलवाल ने स्वयं पुलिसकर्मियों धर्मेंद्र रौतेल और अन्य के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाया था। थलवाल ने पुलिसकर्मियों पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया था, जिसे उच्च न्यायालय ने आलोचना की थी। अब जब महिला अधिवक्ता के आरोप सामने आए हैं, तब इस मामले ने नया मोड़ लिया है।
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समीक्षा के लिए, यह मामला केवल एक व्यक्ति के उत्पीड़न का नहीं है, बल्कि यह न्याय प्रणाली में महिला अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है। ऐसे मामलों में कानून को सख्त और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसी तरह के प्रकरणों में महिलाओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
सिर्फ एक महिला अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि हमारे समाज की सभी महिलाओं को इस तरह की घटनाओं के खिलाफ उठ खड़े होना चाहिए और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।
टिप्पणी: एक पत्रकारिता की दृष्टि से यह मामला महिला के साथ हो रहे उत्पीड़न को प्रकाश में लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैं। हमें इस दिशा में लगातार निगरानी रखनी चाहिए और समाज में बदलाव लाने के प्रयास में मदद करनी चाहिए।
हमारी टीम इस मामले पर नजर रखेगी और आगे की अपडेट्स प्रदान करती रहेगी।
सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, रिया शर्मा
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