महिलाओं के हाथों में 281 सहकारी समितियों की जिम्मेदारी - एक नया अध्याय

Nov 22, 2025 - 21:44
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महिलाओं के हाथों में 281 सहकारी समितियों की जिम्मेदारी - एक नया अध्याय
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड की सहकारी समितियों के चुनावों में 281 समितियों की कमान अब महिलाओं के हाथों में होगी, जिसमें 2517 महिलाएं संचालक मंडल में शामिल हुई हैं।

अविकल उत्तराखण्ड, देहरादून। प्रदेश की सहकारी समितियों के हाल के चुनावों में महिला सशक्तिकरण की एक नई कहानी लिखी गई है। उत्तराखंड की कुल 668 समितियों में से 281 समितियों की कमान महिलाओं को सौंपी गई है। इस महत्वपूर्ण फैसले ने न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है।

महिलाओं की मौजूदगी और उनके नेतृत्व की मजबूती

इन चुनावों में 159 समितियों में उपाध्यक्ष पद पर भी महिलाओं ने जीत दर्ज की है। इससे स्पष्ट है कि सहकारिता में महिलाओं की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हो गई है। विभिन्न समितियों के संचालक मंडल में कुल 2517 महिलाएं निर्वाचित हुई हैं, जो इस क्षेत्र में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण का सबूत है।

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सहकारिता में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह केवल एक संयोग नहीं है, बल्कि एक मजबूत नीयत के साथ उठाया गया कदम है, जिसने महिलाओं की रूचि को सहकारी समितियों की ओर बढ़ाया है।

क्षेत्रवार आंकड़े

प्रदेश की कुल 671 प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एम-पैक्स) के चुनावों में कुल 6486 संचालकों में से लगभग 39 प्रतिशत यानी 2517 महिलाएं विजेता बनी। इस जीत में अल्मोड़ा जनपद में 254, बागेश्वर में 66, चम्पावत में 101, नैनीताल में 213, पिथौरागढ़ में 281, ऊधमसिंह नगर में 154, चमोली में 174, देहरादून में 173, हरिद्वार में 191, पौड़ी में 382, रुद्रप्रयाग में 138, टिहरी में 237 और उत्तरकाशी में 153 महिलाएं शामिल हैं।

महिलाओं का अद्वितीय योगदान

महिलाओं का यह अद्वितीय योगदान न केवल सहकारिता आंदोलन को नई दिशा प्रदान करेगा बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला नेतृत्व और सामुदायिक विकास को भी बल मिलेगा। यह परिवर्तन केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को बदलने में सहायता करेगा।

डाॅ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री, उत्तराखंड ने कहा, "प्रदेश की सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी हम सभी के लिए एक नई ऊर्जा और गति का संचार करेगी। महिलाओं के नेतृत्व से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता जैसे मूल्य और भी मजबूत होंगे।"

इन चुनावों में महिलाओं की बढ़ती संख्या दर्शाती है कि उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। यह केवल साशक्तिकरण की दिशा में एक कदम नहीं बल्कि एक लंबा रास्ता है जो सभी के लिए नए विकल्प और अवसर प्रस्तुत करेगा।

सहकारिता की यह नई धारा विचारों को साझा करने, समस्याओं के समाधान तथा सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक मंच प्रदान करती है।

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टीम अम Rita Bazaar Patrika, सुमिता शर्मा

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