माणा गाँव में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025 का भव्य समापन - सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिकी को मिलेगी नई दिशा

Oct 26, 2025 - 21:44
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माणा गाँव में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025 का भव्य समापन - सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिकी को मिलेगी नई दिशा
माणा गाँव में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025 का भव्य समापन - सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिकी को मिलेगी नई दिशा

माणा गाँव में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025 का भव्य समापन

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माणा गाँव में आयोजित दो दिवसीय “देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025” के समापन समारोह में भाग लिया। इस महोत्सव में स्थानीय समुदायों, पर्यटकों और गणमान्य अतिथियों की जबरदस्त भागीदारी रही, जो सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिकी के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि यह महोत्सव स्थानीय लोगों, सेना और प्रशासन के बीच सहयोग और समन्वय का एक अद्भुत उदाहरण है। इससे ना केवल क्षेत्र की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन के विकास में भी मदद मिलेगी। यह आयोजन भारतीय सेना और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था, जिसमें उत्साह और जोश की कमी नहीं थी।

आर्मी प्रदर्शनी का महत्त्व

मुख्यमंत्री ने महोत्सव के दौरान जिला प्रशासन और सेना द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया, जिसमें “नो योर आर्मी” प्रदर्शनी शामिल थी। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी आम जनता और भारतीय सेना के बीच विश्वास और सहयोग का एक मजबूत पुल बनेगी। इस दौरान, उन्होंने आर्मी द्वारा प्रदर्शित उपकरणों, मॉडल्स और सूचना सामग्री की भी सराहना की। यह कदम सेना और नागरिकों के बीच के संबंधों को और उच्च स्तर पर ले जाने में सहायता करेगा।

पारंपरिक संस्कृति का उत्सव

महोत्सव के दौरान, स्थानीय स्कूली बच्चों ने पारंपरिक लोकनृत्य और गीतों का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने इनमें से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए और कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ गढ़वाली लोक संस्कृति की सुंदरता को प्रकट करती हैं। गढ़वाली बैंड और स्थानीय कलाकारों के परफॉरमेंस ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय कलाकार और कारीगर अपनी कला के माध्यम से समाज को जोड़ते हैं।

स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी

स्थानीय शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों में पारंपरिक बुनाई, लकड़ी के हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, स्थानीय व्यंजन और अन्य धरोहर सामग्री का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के उद्देश्यों को सशक्त बनाते हुए युवाओं और महिलाओं को नए रोज़गार के अवसर प्रदान करेगी। इससे न केवल कामकाजी लोगों की जीवनस्तर में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

एक स्थायी विकास की ओर

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह महोत्सव केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि पर्यटन विकास, रोजगार सृजन और रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने का एक अनिवार्य भाग है। सर्दियों में सीमांत क्षेत्रों की आर्थिकी को सशक्त करने में यह आयोजन सहायक होगा।

कार्यक्रम के अंत में, मुख्यमंत्री ने श्री बद्रीविशाल के दर्शन कर पूजा अर्चना की और प्रदेश व देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। ऐसे आयोजनों से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय समुदायों का योगदान पर्यटन विकास में अविस्मरणीय है।

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Team Amrita Bazaar Patrika - अंजली मेहरा

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