रायवाला में धूमधाम से मनाया गया ईगास पर्व — सांस्कृतिक रंगों में भरा अद्भुत उत्सव
रायवाला में धूमधाम से मनाया गया ईगास पर्व — सांस्कृतिक रंगों में भरा अद्भुत उत्सव
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के रायवाला क्षेत्र में उत्साह और रंगों के संगम के साथ ईगास पर्व का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक महापर्व में शामिल होने के लिए स्थानीय लोग और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए।
रायवाला (हरिद्वार)। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में ईगास पर्व की धूम मची हुई है। इस विशेष अवसर पर श्री रामलीला समिति ने हनुमान चौक, प्रतीतनगर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन ने परंपरागत लोक संस्कृति को जीवंत करते हुए श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ देवेश्वरी द्वारा भैलू जलाने के साथ हुआ, जो इस पर्व की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। इस दौरान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती कुसुम कंडवाल, समिति के संरक्षक श्री दीवान सिंह चौहान, भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री गणेश रावत, वार्ड नंबर 8 के सभासद सुरेश कुकसाल, समिति अध्यक्ष अजय कुमार सिंह, और प्रवक्ता अजय साहू जैसे प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद
इस कार्यक्रम में भव्य छोलिया नृत्य, पारंपरिक लोकगीतों और कई रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिलाओं ने भी पारंपरिक परिधानों में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे लोक संस्कृति का सचित्र प्रदर्शन हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया।
समाज को जोड़ने वाली परंपराएँ
स्वामी रसिक महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “अपनी जड़ों से जुड़ना और संस्कृति को जीवित रखना ही सच्ची धार्मिक साधना है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को अपनी परंपराओं से जोड़े रखते हैं।” वहीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती कुसुम कंडवाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “ईगास बग्वाल दीपावली के 11वें दिन मनाया जाने वाला उत्तराखंड का प्रमुख लोक पर्व है, जो हमारे लोक आस्था, एकता और खुशहाली का प्रतीक है।”
उत्सव का समापन और रंगीन आतिशबाजी
कार्यक्रम के समापन पर रंगीन आतिशबाजी ने वातावरण को उल्लासमय बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं और दर्शकों में पर्व की खुशी और सांस्कृतिक गर्व झलकता रहा, जो इस महोत्सव की सार्थकता को दर्शाता है।
ईगास पर्व ने न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पेश किया, बल्कि यह भी बताया कि कैसे स्थानीय समुदायों का साथ मिलकर अपने जड़ो को संजोने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए।
इस समारोह ने रायवाला को एक नई पहचान दी है और उम्मीद है कि आगे भी ऐसे कार्यक्रम होते रहें ताकि युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रहे।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका - सुषमा वर्मा
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