रैडिएशन ऑन्कोलॉजी में की गई शिक्षा का नया आयाम: दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन
रैडिएशन ऑन्कोलॉजी में की गई शिक्षा का नया आयाम: दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू हुआ है, जिसमें रैडिएशन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और पद्धतियों पर चर्चा की जाएगी।
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एसजीआरआरआईएमएण्डएचएस) में शनिवार से रैडिएशन ऑन्कोलॉजी पर दो दिवसीय शिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। इस शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन ऑफ रैडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया (ए.आर.ओ.आई.) की शैक्षणिक शाखा, इंडियन कॉलेज ऑफ रैडिएशन ऑन्कोलॉजी (आई.सी.आर.ओ.) द्वारा किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 50वां आईसीआरओ शिक्षण कार्यक्रम है, जिसका विषय “लैंडमार्क ट्रायल्स एंड प्रैक्टिस चेंजिंग एविडेंस इन ब्रेस्ट, हेड एंड नेक, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंड गायनिक कैंसर” है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एसजीआरआरआईएमएण्डएचएस के प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि डाॅ. अशोक नायक, निदेशक एवं कार्यक्रम के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डाॅ. मनोज गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. अनिल मलिक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रैडिएशन ऑन्कोलॉजी में स्नातकोत्तर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को स्तन, सिर-गला, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं गाइनिक कैंसर से जुड़ी नवीनतम शोध उपलब्धियों और चिकित्सीय पद्धतियों की जानकारी प्रदान करना है।
कार्यक्रम में जिपमर पांडिचेरी, टाटा अस्पताल मुंबई, टाटा इंस्टिट्यूट संगरूर, टाटा इंस्टिट्यूट मुल्लापुर, एम्स ऋषिकेश, पीजीआई चंडीगढ़, फोर्टिस, मैक्स, अपोलो, राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज, आईजीएमसी शिमला सहित महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों से सौ से अधिक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाग लिया।
इस शिक्षण कार्यक्रम की सफलता के लिए डाॅ. वी. श्रीनिवासन, डाॅ. सी.एस. मधु, डाॅ. राजेश वशिष्ठ, डाॅ. पूजा नंदवानी पटेल, डाॅ. गौतम के. शरण, डाॅ. रचित आहूजा, डाॅ. देबांजन सिक्दर और जनसंपर्क अधिकारी विवेक शर्मा का विशेष योगदान रहा।
रैडिएशन ऑन्कोलॉजी में, आधुनिक तकनीकों और शोधों के माध्यम से कैंसर उपचार की प्रवृत्तियों में तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे कार्यक्रम न केवल छात्रों को अद्यतन जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि कैंसर विशेषज्ञों के बीच एक मंच भी बनाते हैं, जहाँ वे अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और नए विचारों पर चर्चा कर सकते हैं।
ऐसे कार्यक्रमों का चलन चिकित्सा जगत में शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक है। यदि आप इस विषय पर और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें।
इस प्रकार, रैडिएशन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को आवश्यक ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान करने की इस महत्वपूर्ण पहल को देखकर स्पष्ट है कि हमारे देश में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रगति के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।
टीम अम्रीता बज़ार पत्रिका, सुधा मेहता
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