लालकुआं में धार्मिक महोत्सव, डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का भव्य स्वागत एवं श्रीराम कथा का शुभारंभ

Oct 31, 2025 - 00:44
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लालकुआं में धार्मिक महोत्सव, डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का भव्य स्वागत एवं श्रीराम कथा का शुभारंभ
लालकुआं में धार्मिक महोत्सव, डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का भव्य स्वागत एवं श्रीराम कथा का शुभारंभ

धर्म और संस्कृति का महोत्सव: डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का भव्य स्वागत

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कम शब्दों में कहें तो, धर्मनगरी लालकुआं ने प्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का भव्य स्वागत किया, और उनसे 18 दिसंबर से शुरू होने वाली श्रीराम कथा का आयोजन होने जा रहा है।

30 अक्टूबर को, जब धर्मनगरी लालकुआं उनकी उपस्थिति से रोशन हो उठी, तब राधे-राधे सेवा समिति ने उनका स्वागत करने के लिए एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर नगर की जनता के अलावा, स्थानीय नेताओं और भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का स्वागत किया।

स्वागत समारोह का आयोजन

स्वागत समारोह का आयोजन राधे-राधे सेवा समिति द्वारा किया गया। उनके स्वागत में विभिन्न الثقافات का समागम देखने को मिला, जिसमें भक्ति गीतों के साथ-साथ नृत्य और विभिन्न आस्था की रस्मों का निर्वहन किया गया। डॉ. मिश्रा ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि कथा सुनने के माध्यम से हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

श्रीराम कथा का महत्व

18 दिसंबर से श्रीराम कथा का आयोजन होने जा रहा है, जो कि धार्मिक उत्साह को और बढ़ा देगा। श्रीराम कथा हमारे जीवन में संतुलन और शांति लाने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है। डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ इस कथा का आयोजन करने जा रहे हैं, और उनकी कथावाचन शैली को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

लोगों ने डॉ. मिश्रा का स्वागत करते हुए जश्न मनाया, और उनके प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त की। स्थानीय भक्तों का कहना है, "डॉ. मयंक की कथा सुनना एक अद्भुत अनुभव होता है। उनके शब्दों में एक विशेष ऊर्जा और प्रेरणा होती है।"

उपसंहार

इस भव्य स्वागत समारोह ने एक बार फिर दिखा दिया कि धर्म और संस्कृति के प्रति हमारी आस्था कितनी गहरी है। डॉ. पंकज मिश्रा ‘मयंक’ का आगमन और श्रीराम कथा का आयोजन निश्चित रूप से लालकुआं के जनजीवन को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सवों की यह परंपरा हमें न केवल धार्मिकता से जोड़ती है, बल्कि हमारे जीवन को भी संवारने का कार्य करती है। इस महान अवसर पर हम सभी को एकजुट होकर अपने संस्कृति की धरोहर को बनाए रखना चाहिए।

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सादर,

टीम अमृता बाजार पत्रिका

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