सीएम धामी ने हरिद्वार में संतों से प्राप्त की 'सनातन के रक्षक' की उपाधि

Jun 19, 2026 - 21:44
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सीएम धामी ने हरिद्वार में संतों से प्राप्त की 'सनातन के रक्षक' की उपाधि
सीएम धामी ने हरिद्वार में संतों से प्राप्त की 'सनातन के रक्षक' की उपाधि

हरिद्वार में संतों ने कहा, सीएम धामी सनातन के रक्षक

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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संतों द्वारा 'सनातन के रक्षक' की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के साथ ही सीएम धामी ने राज्य की आध्यात्मिक पहचान और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।

उत्तरी भारत के इस धार्मिक तीर्थ स्थल में, शुक्रवार को भूपतवाला में हुई इस बैठक में सीएम धामी ने भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण हेतु विहिप की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "विहिप पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।"

भारत की सांस्कृतिक पहचान और धामी की योजनाएँ

सीएम धामी ने बेहतरीन व्याख्या की कि आज के युग में जब देश तेजी से परिवर्तन की दिशा में बढ़ रहा है, तब हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी वर्गों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान करने की अपील की। धामी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का एक अवसर बताया।

उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने हेतु तेजी से कार्य कर रही है। वे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसे कार्यों पर भी प्रकाश डालते हुए सजगता से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

CM Dhami Addressing meeting

परियोजनाएँ और सांस्कृतिक संरक्षण

सीएम धामी ने लोगों को बताया कि उनकी सरकार केदारखण्ड एवं मानसखण्ड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण पर तेजी से कार्य कर रही है। इसके साथ ही हरिपुर कालसी के यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार और हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर ध्यान दिया गया है।

साथ ही, उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए सख्त कानूनों की बात कही, जिसमें धर्मांतरण विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता जैसे कदम शामिल हैं।

युवाओं के लिए सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र

सीएम धामी ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की भी घोषणा की, जहां भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं सभ्यता पर अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

संतों का आशीर्वाद और प्रतिक्रिया

इस बैठक में कई प्रमुख संत-महात्माओं ने सीएम धामी को धर्मरक्षक और देवभूमि के देवालयों का सेवक बताते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि ने कहा कि धामी सरकार ने उत्तराखंड में सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

Meeting Participants

उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए उठाए गए कदमों ने उत्तराखंड को एक आदर्श मॉडल बना दिया है।

बैठक की अध्यक्षता अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज ने की और इसमें कई प्रतिष्ठित संत-महात्मा उपस्थित रहे।

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इस समाचार लेख को संपादित किया है, टीम अमृता बाजार पत्रिका द्वारा, कविता शर्मा।

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