सूबे के डेढ़ दर्जन राजकीय महाविद्यालयों को मिले स्थाई प्राचार्य: शिक्षा में नया अध्याय
सूबे के डेढ़ दर्जन राजकीय महाविद्यालयों को मिले स्थाई प्राचार्य: शिक्षा में नया अध्याय
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
कम शब्दों में कहें तो, राज्य के डेढ़ दर्जन राजकीय महाविद्यालयों को स्थाई प्राचार्य मिल गए हैं, जो प्रशासनिक एवं शैक्षणिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
देहरादून, 30 अक्टूबर 2025। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत डेढ़ दर्जन राजकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति का कार्य पूर्ण हो गया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुमोदन के उपरांत, यह कदम महाविद्यालयों में प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए उठाया गया है। नए तैनात प्राचार्यों को विभिन्न स्थानों पर नियुक्त किया गया है ताकि वे अपने-अपने महाविद्यालयों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में गुणात्मक सुधार ला सकें।
प्राचार्यों की स्थायी तैनाती के लाभ
प्राचार्यों की स्थायी तैनाती के साथ ही, महाविद्यालय में चल रही प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद की जा रही है। इसके चलते, अध्ययनरत छात्रों और शिक्षकों को बेहतर वातावरण और संसाधनों का लाभ मिलेगा।
प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में प्रशासनिक सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं। खासकर महाविद्यालयों की रैंकिंग और नैक मूल्यांकन में सुधार लाने के लिए प्रशासनिक क्रियान्वयन पर फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम में, प्रत्येक महाविद्यालय में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है।
नवीन तैनाती स्थल की जानकारी
इन प्राचार्यों की नवीन तैनाती स्थलों के तहत इन्हें निम्नलिखित स्थानों पर नियुक्त किया गया है:
- सुश्री प्रीति त्रिवेदी - राजकीय महाविद्यालय पतलोट, नैनीताल
- सुरेश चन्द्र मंमगाई - पौखाल, टिहरी गढ़वाल
- डॉ. शैराज अहमद - तलवाड़ी, चमोली
- डी.एन. तिवारी - गरूड़, बागेश्वर
- डॉ. बचीराम पंत - मंगलौर, हरिद्वार
- सुश्री प्रणीता नंद - नरेन्द्रनगर, टिहरी
- डॉ. मृत्युंजय कुमार शर्मा - त्यूणी, देहरादून
- डॉ. सीमा चौधरी - गरूड़ाबांज, अल्मोड़ा
- पुष्कर सिंह बिष्ट - जसपुर, ऊधमसिंह नगर
- जयचन्द्र कुमार - काण्डा, बागेश्वर
- डॉ. अरविंद सिंह - उफरैंखाल, पौड़ी
- डॉ. मुकेश कुमार - नैनबाग, टिहरी
- डॉ. राधेश्याम गंगवार - थत्यूड़, टिहरी
- डॉ. कमरूद्दीन - लमगड़ा, अल्मोड़ा
- डॉ. कल्पनाथ सिंह यादव - नैनीडांडा, पौड़ी
- डॉ. विद्या शंकर शर्मा - घाट, चमोली
- डॉ. हरीश चन्द्र - कण्वघाटी, कोटद्वार
- डॉ. नर्वदेश्वर शुक्ल - राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग, टिहरी गढ़वाल
प्राचार्यों को एक सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी स्थान पर योगदान देना होगा, जिसकी सूचना आवश्यक रूप से शासन को उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी प्राचार्य ने पदोन्नति का परित्याग किया, तो उसके विरुद्ध फोरगो नियमावली के तहत कार्यवाही की जाएगी।
सरकार की प्रतिबद्धता
“राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और गुणवत्तापरक बनाने के लिए प्राचार्यों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों के रिक्त पदों को लगातार भरा जा रहा है। इससे महाविद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने के साथ-साथ शैक्षणिक गतिविधियों में भी गुणात्मक सुधार होगा।” - डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड
इस प्रकार, राजकीय महाविद्यालयों में स्थाई प्राचार्यों की तैनाती से न केवल प्रशासनिक सुधार में तेजी आएगी, बल्कि शैक्षणिक माहौल भी सुधरेगा, जिससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अधिक अपडेट के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट Amrita Bazaar Patrika पर जाएँ।
इस खबर को पढ़ने के लिए धन्यवाद।
संवाददाता: स्नेहा शर्मा
टीम अमृता बाजार पत्रिका
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0