सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए देहरादून में धरना: हिमालय की रक्षा का संघर्ष
सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए देहरादून में धरना: हिमालय की रक्षा का संघर्ष
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन हिमालय के संरक्षण के लिए उनकी लड़ाई का प्रतीक है।
देहरादून: सोनम वांगचुक, जो एक जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, की रिहाई के लिए रविवार को देहरादून में एक ऐतिहासिक धरना आयोजित किया गया। 'सोनम वांगचुक रिहाई मंच' के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सोनम वांगचुक की लड़ाई सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे हिमालय क्षेत्र के संरक्षण की लड़ाई भी है। उत्तराखंड से लेकर लद्दाख तक, यह आंदोलन वह आवाज़ है जो हिमालय के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाई जा रही है।
सामाजिक संगठनों की एक जुटता
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की आरएसएस-बीजेपी सरकार देश के उन नागरिकों को डराने का प्रयास कर रही है, जो उनके विचारों के साथ सहमत नहीं हैं। जब तक सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया, तब तक वे बीजेपी के हीरो रहे। लेकिन जैसे ही उन्होंने लद्दाख की जनता के लिए छठी अनुसूची लागू करने की मांग की, उन्हें देशद्रोही करार दिया गया।
वक्ताओं का अनोखा बयान
प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले नेताओं ने कहा, "यदि पाकिस्तान जाना देशद्रोह है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सबसे बड़े देशद्रोही हैं।" उन्होंने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को उन सभी आलोचकों को डराने के लिए एक तरीके के रूप में देखा, जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में देशभर से हो रहे विरोध प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि सरकार का यह प्रयास असफल रहा।
प्रदर्शन का आयोजन
इस कार्यक्रम के अध्यक्षता कमला पंत ने की जबकि संचालन हरिओम पाली ने किया। सतीश धौलाखंडी ने कार्यक्रम की शुरुआत एक जनगीत से की। प्रदर्शन के अंत में अरुण और उनकी टीम द्वारा गाए गए गीत ने समारोह को सकारात्मक ऊर्जा दी। इसके अलावा, सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।
महत्वपूर्ण उपस्थिति
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तित्व मौजूद थे, जैसे डॉ. रवि चोपड़ा, डॉ. एसएन सचान, निर्मला बिष्ट, विजय भट्ट, और कई अन्य। शामिल लोगों की संख्या में सैकड़ों लोग थे, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण संदेश को फैलाने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए यह प्रदर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई है, बल्कि यह सामूहिक रूप से हिमालय के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। यह आंदोलन आगे बढ़ने और अपनी आवाज़ उठाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। नागरिकों की एक जुटता ही वह शक्ति है, जो किसी भी सरकार के खिलाф आवाज़ उठाने में सक्षम होती है।
हालांकि सोनम वांगचुक की रिहाई जी एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि उनकी आवाज़ सुनने में और उन्हें न्याय नहीं मिलता। हम सभी को इस लड़ाई में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और पर्यावरण की रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
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