स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की संन्यास जयंती पर भव्य संत समागम: हरिद्वार में Spirituality का उत्सव
स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की संन्यास जयंती पर भव्य संत समागम
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कम शब्दों में कहें तो, स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की 71वीं संन्यास जयंती पर हरिद्वार में भव्य संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री ने गंगा घाट का लोकार्पण भी किया।
हरिद्वार में विशेष आयोजन
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हरिद्वार में स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की संन्यास जयंती मनाने के लिए एक भव्य संत समागम हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर नमामि गंगे योजना के अंतर्गत निर्मित अखंड परमधाम गंगा घाट का भी लोकार्पण किया गया, जिससे गंगा नदी के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया गया।
सरकार ने किया यात्रा का आश्वासन
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर चारधाम यात्रा की शुरुआत की घोषणा की, जिसमें मां गंगा और मां यमुना के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यात्रियों की सुरक्षित, सुगम, और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्कृति और आस्था का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने सभी संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया और कहा कि यह आयोजन केवल एक घाट के लोकार्पण का अवसर नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने स्वामी परमानन्द गिरि के जीवन को तप और सेवा का उदाहरण बताते हुए उनके विचारों को मानव कल्याण के मार्ग में अग्रसर करने वाला बताया।
संतों का योगदान
मुख्यमंत्री ने साध्वी ऋतंभरा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणास्त्रोत है। संतों का सानिध्य समाज को भलाई और आध्यात्मिक मूल्यों की दिशा में मार्गदर्शन करता है।
उत्तराखंड की आध्यात्मिक राजधानी का सपना
धामी ने कहा कि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार कई योजनाओं पर कार्य कर रही है। इसमें केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का विकास, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण, और दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना शामिल हैं।
संबंधित कानूनों का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता लागू करने और अन्य सांस्कृतिक कानूनों का भी उल्लेख किया, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संतुलन को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने समाज के समग्र विकास के लिए आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संत-महात्माओं की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण समारोह में पूज्य स्वामी बालकानंद जी महाराज, योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा सहित कई अन्य संत-महात्मा उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम ने न केवल आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया, बल्कि सामुदायिक सामंजस्य को भी प्रोत्साहित किया।
इस प्रकार, स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की जयंती पर आयोजित यह संत समागम न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को भी उजागर करता है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, सृष्टि शर्मा
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