हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार की सख्त कार्रवाई, पूर्व नगर आयुक्त बर्खास्त, डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति
हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार की सख्त कार्रवाई
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले में एक कड़ी कार्रवाई की है। पूर्व नगर आयुक्त को बर्खास्त कर दिया गया है और तत्कालीन जिलाधिकारी पर कठोर दंड की संस्तुति की गई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण के संदर्भ में एक अहम कदम उठाया है। इस प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। इसके साथ ही, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपने पद के कर्तव्यों में लापरवाही के लिए दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को उचित कार्रवाई के लिए संस्तुति भेजी जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
इस मामले में, कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियों को रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह कार्रवाई हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले में हुई विसंगतियों को उजागर करने के बाद की गई है।
गौरतलब है कि जब हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद के मामले का पता चला, वैश्विक रूप से मुख्यमंत्री धामी ने सख्त रुख अपनाया। प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आने पर, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के साथ कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके पश्चात, विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से मामले की गहराई से विवेचना की गई।
धामी सरकार का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कहीं भी कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि शासन और प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, और जनहित हमेशा से प्राथमिकता में रहेंगे। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
धामी सरकार की यह कार्रवाई राज्य में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्यवाहियों में से एक मानी जा रही है। इसने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। यह कार्यवाही न केवल हरिद्वार के लोगों को न्याय दिलाने का परिचायक है, बल्कि यह उत्तराखंड में जनहित की सख्त परिभाषा भी प्रस्तुत करती है।
राज्य की जनता इस कदम के प्रति सकारात्मक दृष्टि रखती है क्योंकि यह दर्शाता है कि सरकार अपने नागरिकों के प्रति कितनी गंभीर है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई आवश्यक और महत्वपूर्ण है।
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Team Amrita Bazaar Patrika
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