हरिद्वार: मोर्चरी में चूहों ने चुराई शव की सुरक्षा, परिजनों में हाहाकार
हरिद्वार: मोर्चरी में चूहों ने चुराई शव की सुरक्षा, परिजनों में हाहाकार
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार के जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखे एक शव को चूहों ने कुतर दिया, जिससे परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। यह घटना न केवल परिजनों के लिए बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनी है, जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, ज्वालापुर स्थित पंजाबी धर्मशाला के मैनेजर लखन शर्मा उर्फ लकी, उम्र 36 वर्ष का बीते रोज शाम के समय हृदयगति रुकने से निधन हो गया था। परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया। लेकिन जब शनिवाल सुबह परिवार के सदस्य मोर्चरी पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि शव के चेहरे और आंख पर चोट जैसे गंभीर निशान थे, जिससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया।
ट्रॉमा और दुख के इस वक्त में परिजनों ने गंभीर सुरक्षा व्यवस्था की कमी की ओर इशारा किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मोर्चरी की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है, जिससे शव तक सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं। उनकी पीड़ा को समझते हुए पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने बिना किसी देरी के स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कांग्रेस नेता भी अस्पताल पहुंचे और मोर्चरी के बाहर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी की। उन्होंने भी मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की। पारिवारिक सदस्य अन्य लोगों के साथ मिलकर जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे थे।
हंगामे के दौरान, स्वास्थ्य विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं हुआ, जिससे परिजनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश और बढ़ गया। उन्होंने मोर्चरी व्यवस्था की जांच और जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि मोर्चरी में लगे डीप फ्रीजर का दरवाजा खराब होने के कारण संभवतः चूहा घुसकर शव को कुतरने का मामला हुआ है। उन्होंने बताया कि रेफ्रिजरेटर की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को लिखा गया है और मामले की जांच की जाएगी। सभी व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या इस प्रकार के हादसे को रोका नहीं जा सकता? क्या शवों की सुरक्षा को लेकर अस्पताल में उचित सावधानियां नहीं बरती जा रही हैं? यह मामले अब पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चुनौती बन गया है।
परिजनों की लगातार मांग और चिकित्सा प्रशासन की लापरवाही इस बात को दर्शाती है कि हमें यहां एक सख्त उपाय और सुधार के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। सुविधाओं की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ने से आगे भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।
हम सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि स्वास्थ्य सेवा केवल चिकित्सा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि शवों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। सभी व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे संकटों का सामना न करना पड़े।
स्रोत: Amrita Bazaar Patrika
यहां परिजनों की भावनाओं की गंभीरता, शहर में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति और प्रशासन की प्रतिक्रिया के संबंध में जो टिप्पणियां की गई हैं, वह समाज के एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर इशारा करती हैं। टीम अमृता बाजार पत्रिका - साक्षी शर्मा
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