मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” : ऐतिहासिक सफलता की नई मिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” : ऐतिहासिक सफलता की नई मिसाल
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा शुरू किया गया “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम उत्तराखंड में जवाबदेह और संवेदनशील शासन का एक दर्शनीय उदाहरण साबित हुआ है। हाल ही में 17 जनवरी 2026 तक प्राप्त आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि सरकार न केवल नागरिकों की समस्याओं को सुन रही है, बल्कि उनका त्वरित समाधान भी कर रही है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार का “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में संवेदनशील और परिणामोन्मुखी शासन का एक सशक्त डेमो बन चुका है। इसका उद्देश्य जनता के दरवाजे पर सरकारी सुविधाओं को पहुंचाना है, जिससे आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हो सके।
इस कार्यक्रम के तहत राज्य के 13 जनपदों में अब तक कुल 383 शिविरों का सफल आयोजन हो चुका है। इनमें सिर्फ आज के दिन ही 18 शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 19,875 नागरिकों ने अपनी समस्याएँ साझा कीं। इस पहल के माध्यम से 3,07,705 नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया है, जो सरकार के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है।
इन शिविरों में अब तक 31,288 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 21,047 का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। प्रशासनिक सक्रियता और त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया की वजह से नागरिकों को उनकी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया में तेजी देखने को मिली है।
इसके अलावा, 42,116 विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र उक्त शिविरों के माध्यम से जनता को जारी किये गए हैं। इसके जरिए जाति, निवास, आय और अन्य प्रमाण पत्रों की घर-घर उपलब्धता ने आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में जाकर घंटों इंतजार करने से राहत प्रदान की है।
राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत अब तक 1,67,940 से अधिक नागरिकों को लाभान्वित किया गया, जिसमें आज के दिन 9,701 नए लाभार्थी शामिल हैं। सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सीधी डोर-स्टेप डिलीवरी मुख्यमंत्री धामी की प्रशासनिक दक्षता का एक और उदाहरण है।
जनपदवार आंकड़ों को देखकर स्पष्ट होता है कि हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून, अल्मोड़ा सहित सभी जिलों में इस अभियान ने शानदार प्रभाव छोड़ा है। विशेषकर हरिद्वार और देहरादून में नागरिकों की बड़ी संख्या ने अपने शिकायतों का समाधान प्राप्त करने के लिए शिविरों में भाग लिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल शिकायतों का निस्तारण किया बल्कि यह राज्य सरकार और आम नागरिक के बीच विश्वास और संवाद का एक सशक्त पुल भी बन गया है। यह अभियान यह साबित करता है कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और निष्पक्ष समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री धामी के कुशल नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुशासन का अर्थ केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन नीतियों का धरातल पर प्रभावी परिणाम दिखाना है। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम मुख्यमंत्री धामी के कार्यों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसने उत्तराखंड को एक संवेदनशील शासन मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
राधिका रस्तोगी
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