योग सम्पूर्ण स्वास्थ्य का सर्वश्रेष्ठ माध्यम: प्रो. एम. एस. रावत का सन्देश

Jun 21, 2026 - 00:44
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योग सम्पूर्ण स्वास्थ्य का सर्वश्रेष्ठ माध्यम: प्रो. एम. एस. रावत का सन्देश

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कम शब्दों में कहें तो, योग वर्तमान में सम्पूर्ण स्वास्थ्य का सबसे बेहतर और नुकसान रहित माध्यम बन चुका है, इस विचार को श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. एम. एस. रावत ने अपने वक्तव्य में साझा किया।

ऋषिकेश, 20 जून। श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पं. ल. मो. शर्मा परिसर में योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय निःशुल्क योग शिविर का यह छठा दिन था, जिसमें प्राणायाम, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। प्रो. रावत ने यहां बताया कि योग केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि एक जीवनशैली है जो समाज के प्रत्येक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

योग का महत्व और इसके प्रभाव

प्रो. रावत ने कहा कि आज के समय में हमें ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है जो केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ ही न हों, बल्कि मानसिक रूप से संतुलित, संवेदनशील और सकारात्मक सोच वाले भी हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग का अभ्यास न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है।

योग शिक्षिकाओं द्वारा प्रशिक्षण

इस सत्र में योग शिक्षिकाओं सुरभि और अंजलि ने प्रतिभागियों को कपालभाति, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं उज्जायी प्राणायाम का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने प्राणायाम की विधि, अवधि, सावधानियों और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी प्रदान की।

प्राणायाम के लाभ

योग शिक्षिकाओं ने प्रतिभागियों को बताया कि नियमित प्राणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रक्त संचार में सुधार होता है, और मानसिक तनाव में कमी आती है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह जीवन के अन्य पहलुओं में भी सकारात्मकता लाता है।

प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो. पी.के. सिंह, योग समन्वयक प्रो. वी. के. गुप्ता, और विभागाध्यक्ष डा. जयप्रकाश कंसवाल समेत कई अन्य शिक्षकों और प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। यह शिविर नई सोच और जिज्ञासा का केंद्र बन रहा है, जहां अनगिनत प्रतिभागी योग को अपने जीवन में शामिल करने का सामर्थ जगाते हैं।

योग सिर्फ एक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक गहन अनुभव है जो हमारे जीवन को समर्पित करते हुए हमें आंतरिक शांति और संतुलन की ओर अग्रसर करता है।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
संजय शर्मा

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