कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की भक्ति की लहर से मन मोहने वाली प्रस्तुति

Oct 16, 2025 - 14:44
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कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की भक्ति की लहर से मन मोहने वाली प्रस्तुति
कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की भक्ति की लहर से मन मोहने वाली प्रस्तुति

कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की भक्ति की लहर से मन मोहने वाली प्रस्तुति

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से भक्ति की एक नई लहर को जन्म दिया है। उनकी नृत्य कला ने दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस प्रस्तुत में उन्होंने कई धार्मिक भावनाओं को जीवंत किया, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक भावनात्मक और प्रभावशाली था।

नृत्य की अनुपम खुराक

अरुणिमा कुमार की प्रस्तुति में शामिल थे अनेक भक्ति गीत जैसे सूर्य स्तुति, अर्धनारीश्वर, देव देवम भजे, कलिंग नर्तनम, शिव तरंगम और दुशासन वध। इन गीतों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों को एक नई दृष्टि प्रदान की। विशेष रूप से, अर्धनारीश्वर नृत्य की प्रस्तुति राग मालिका में ताल मालिका के साथ की गई, जो दर्शकों को मनमोहित कर गई।

कुचिपुड़ी की महिमा

कुचिपुड़ी एक उच्चकोटि की भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली है, जो अपनी अद्वितीय गति, भावनाओं और नाटक के संगम के लिए जानी जाती है। अरुणिमा कुमार इस विधा की एक उत्कृष्ट प्रतिनिधि हैं। उनकी अगली प्रस्तुति 'कलिंग नारायणम' में बाल कृष्ण और कालिया सर्प के युद्ध को नृत्य के माध्यम से अत्यंत रोचकता से दर्शाया गया। इस नृत्य में मंच पर उनकी अदाकारी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आर्टिस्ट प्रोफाइल

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में आरुणिमा कुमार को एक अनमोल सितारा माना जाता है। 2008 में संगीत नाटक अकादमी के युवा पुरस्कार से सम्मानित होने वाली, वह न केवल कुचिपुड़ी नृत्य की महारथी हैं, बल्कि उन्होंने 9 वर्ष की आयु में बैले आम्रपाली में भी अभिनय किया है। उन्हें कुचिपुड़ी नृत्य अकादमी के माध्यम से वर्ष 1995 में औपचारिक रूप से पेश किया गया।

उन्होंने 2008 में प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार जीता, और अभी लंदन में एरिसेंट समूह में मानव संसाधन सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। अरुणिमा ने 7 वर्ष की आयु में कुचिपुड़ी नृत्य सीखना प्रारंभ किया और पद्म भूषण स्वप्ना सुंदरी से प्रशिक्षण लिया।

अंतर्राष्ट्रीय पहचान

अरुणिमा कुमार ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपने नृत्य से दर्शकों का दिल जीता है। उन्हें 1998 में नृत्य के लिए साहित्य कला परिषद की छात्रवृत्ति भी दी गई। साथ ही, 2001 में सुर श्रृंगार संसद द्वारा श्रृंगारमणि की उपाधि भी प्राप्त हुई। वह युवा कला को बढ़ावा देने के लिए अपनी परियोजनाओं की संकल्पना और कार्यान्वयन में भी सक्रिय हैं।

सकारात्मक सामाजिक प्रभाव

वे कला के माध्यम से शांति और सद्भाव का सन्देश फैलाने की दिशा में कई सामाजिक परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। अरुणिमा ने कला फाउंडेशन भी स्थापित किया है, जिससे छोटे शहरों और गांवों में कला को प्रोत्साहन दिया जा सके।

इस तरह, अरुणिमा कुमार ने न केवल भारतीय संस्कृति की धारा को सहेजा है बल्कि नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया है कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को पहचान सकें और इसे आगे बढ़ा सकें। उनके माध्यम से कुचिपुड़ी शैली की पहचान ने एक नई पहचान हासिल की है।

उनकी इस अनूठी प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों में भक्ति का एक नया अंश जोड़ा है। इस प्रकार उनके नृत्य ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि साक्षरता, संस्कृति और भक्ति का संचार भी किया।

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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका

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