विज्ञान की पाठशाला: वैज्ञानिक सोच का विकास

Nov 18, 2025 - 07:44
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विज्ञान की पाठशाला: वैज्ञानिक सोच का विकास
विज्ञान की पाठशाला: वैज्ञानिक सोच का विकास

विज्ञान की पाठशाला: वैज्ञानिक सोच का विकास

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में विज्ञान की पाठशाला का आयोजन छात्रों में वैज्ञानिक सोच जगाने के लिए किया गया।

अविक्ल उत्तराखण्ड

देहरादून। 17 नवंबर को राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अजबपुर कला में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) एवं प्रथम समिति के सहयोग से विज्ञान की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना, जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का उद्देश्य और दिशा

यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह राणा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के मार्गदर्शन में यूकॉस्ट विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के सीमांत और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान का प्रचार-प्रसार और पर्यावरण जागरूकता हेतु प्रयासरत है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता और इसके मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

व्यावहारिक विज्ञान का प्रदर्शन

सोहन सिंह रावत ने विद्यार्थियों को कबाड़ से वैज्ञानिक उपकरण बनाने की विधि सिखाई और कई उपयोगी मॉडल बनाकर दिखाए। वहीं, प्रथम समिति के विजय भट्ट ने वैज्ञानिक जागरूकता को आसान भाषा में समझाने के साथ-साथ जादू की विभिन्न ट्रिक्स और उनके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को भी छात्रों के सामने रखा।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का प्रेरणादायक जीवन

उमा भट्ट ने विज्ञान की कहानी का इस्तेमाल करते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन और उनके वैज्ञानिक संघर्षों के बारे में विद्यार्थियों को बताया। मुख्य अतिथि पदमश्री कल्याण सिंह रावत ने इस अवसर पर मैती आंदोलन और इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा की।

विज्ञान की पाठशाला

कार्यक्रम का संचालन और प्रतिभागिता

कार्यक्रम का संचालन मनीष बिष्ट ने किया, जिसमें एम.पी. बडोला, शक्ति, दिनेश्वरी नेगी सहित 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को बल्कि शिक्षकों और समुदाय के सभी सदस्यों को विज्ञान की महत्वपूर्णता को समझने का अवसर प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी न केवल शैक्षणिक जानकारी प्रदान करना है, बल्कि छात्रों में जिज्ञासा और खोज करने की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को एक बेहतर और सस्टेनेबल भविष्य की ओर अग्रसर करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

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सादर,
टीम अम Rita Bazaar Patrika
ब्रजमोहन कुमारी

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