सीएम पुष्कर सिंह धामी का 'सशक्त बहना उत्सव': महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करें

Oct 17, 2025 - 00:44
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सीएम पुष्कर सिंह धामी का 'सशक्त बहना उत्सव': महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करें
सीएम पुष्कर सिंह धामी का 'सशक्त बहना उत्सव': महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करें

सीएम पुष्कर सिंह धामी का 'सशक्त बहना उत्सव': महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करें

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में ‘सशक्त बहना उत्सव’ के दौरान महिलाओं को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, “महिलाएँ बनें आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की अग्रदूत।” इस आयोजन ने महिलाओं के विभिन्न कौशल विकास पर जोर दिया, जिसमें मट्ठा निर्माण, ऐंपण कला, सोल्डरिंग, धान कूटने और लौह उत्पाद निर्माण शामिल था।

महिलाओं का सशक्तिकरण: एक जरूरी कदम

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में जोर दिया कि महिलाओं की प्रतिभा और उनके कार्य कौशल राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "महिलाओं की सहभागिता से न केवल उनके आत्मनिर्भर होने की संभावना बढ़ती है, बल्कि यह प्रदेश के विकास में भी सहायक होती है। हमें चाहिए कि हम उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दें," उन्होंने कहा।

नारी: शक्ति और मुस्कान का प्रतीक

‘सशक्त बहना उत्सव’ का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनकी उत्पादकता को भी उजागर करना था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित महिलाओं से कहा कि वे अपने कौशल का विकास करें और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एकसाथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा, "नारी किसी भी समाज की शक्ति होती है; उसकी मुस्कान प्रदेश की सफलता का प्रतीक है।"

कार्यशालाएं और कौशल विकास

उत्सव के दौरान विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनमें महिलाएं मट्ठा निर्माण, ऐंपण कला और धान कूटने के सहायक कौशल सीख रही थीं। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य न केवल कौशल विकास करना है, बल्कि महिलाओं को उनके घरेलू और व्यवसायिक जीवन में भी समर्थ बनाना है।

समाज में सकारात्मक बदलाव की ओर कदम

इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएँ लागू कर रही है, जो राज्य की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से स्वतंत्र बनाने में मदद करेंगी।

निष्कर्ष

‘सशक्त बहना उत्सव’ ने एक बार फिर साबित किया है कि महिलाओं की भूमिका केवल पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। यह उत्सव महिलाओं को प्रेरित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

आगे चलकर, हम सभी को मिलकर इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है, ताकि उत्तराखंड की महिलाएं हर आयाम में सफल हो सकें। महिलाओं को उनके हक दिलाने और उन्हें सशक्त बनाने की यात्रा निरंतर जारी रहेगी।

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टीम अम Rita Bazaar Patrika, संगीता तिवारी

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