सीमांत धारचूला और मुनस्यारी में आपदा प्रबंधन पर बहस और प्रशिक्षण
सीमांत धारचूला और मुनस्यारी में आपदा प्रबंधन पर बहस और प्रशिक्षण
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कम शब्दों में कहें तो धारचूला और मुनस्यारी में आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यशाला ने स्थानीय समुदायों की क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया है। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और त्वरित प्रतिक्रिया के तरीके सिखाना था।
पिथौरागढ़। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सहयोग से देव भूमि पहाड़ समिति द्वारा धारचूला और मुनस्यारी में 16 से 21 जनवरी तक आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय जनसंख्या को भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता प्रदान करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों (VPDO) द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस कार्यशाला में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें 15 अन्य स्थानीय लोग भी शामिल हुए। इस योजना के अंतर्गत, प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार तथा खोज-बचाव से संबंधित वैज्ञानिक और व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
विशेषज्ञों की उपस्थिति
प्रशिक्षण सत्र में मास्टर ट्रेनर कुलदीप सिंह ने भूकंप और बाढ़ जैसे प्राकृतिक खतरों से बचाव को लेकर विस्तृत जानकारी प्रदान की। ट्रेनिंग के दौरान विपुल पंवार (चीफ इंस्ट्रक्टर) ने मॉक ड्रिल और व्यावहारिक अभ्यास कराते हुए प्रतिभागियों को प्राथमिक उपचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया के तरीके सिखाए। प्रतिभागियों को आपात स्थिति के दौरान आवश्यक उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी दी गई, जिससे वे प्रभावी सहायता प्रदान कर सकें।
इस कार्यक्रम में दीपा देवी ने सुझाव दिया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यकम ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विद्यालयों में भी आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बच्चों को भी आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा सके। धारचूला के ग्राम प्रधान मनोज सिंह ने भी इस तरह के कार्यक्रमों की उपयोगिता की सराहना की और कहा कि सीमांत क्षेत्र होने के कारण ये प्रशिक्षण अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं।
मुनस्यारी के ग्राम प्रधान रजत सिंह ने भी प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया, और उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि देव भूमि पहाड़ समिति पूरे जनपद में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित करे। वह यह भी चाहते थे कि विद्यालयों के साथ-साथ डिग्री कॉलेजों में भी आपदा प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक आपदा से बचाव की जानकारी पहुंच सके।
स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी
कार्यक्रम में देव भूमि पहाड़ समिति के दयाल सिंह रावत, वीरेन्द्र सिंह, और अंकुर सिंह विष्ट के साथ-साथ ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों केएम मीनाक्षी भट्ट, नारायण सिंह, नरेन्द्र सिंह, कमल सिंह और प्रेम सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी मानते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आपदा प्रबंधन के लिहाज से यह कार्यशाला न केवल एक जागरूकता अभियान थी, बल्कि यह स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों से भी अवगत कराने का एक मंच साबित हुई। इस प्रकार के आयोजन न केवल आपदा के समय बेहतर तैयारी को सुनिश्चित करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग का भी परिचायक होते हैं।
आगे भी ऐसी प्रशिक्षण कार्यशालाएं जरूरी हैं ताकि हर नागरिक प्राकृतिक आपदाओं के समय जल्दी और सही तरीके से प्रतिक्रिया कर सके।
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संपादकीय हस्ताक्षर: स्नेहा शर्मा, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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