स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल: निर्बलों के लिए आशा की किरण, एक श्रद्धांजलि
स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल: निर्बलों के लिए आशा की किरण, एक श्रद्धांजलि
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कम शब्दों में कहें तो, शिक्षाविद सत्यप्रकाश थपलियाल का निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी शिक्षा और समाज सेवा का कार्य अब भी लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
कोटद्वार: शिक्षाविद और समाज सुधारक स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल ने 24 जुलाई 2026 को सफदरजंग अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली। उनकी यात्रा बैकुंठ धाम की ओर, न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी रिक्तता लेकर आई है। सत्यप्रकाश जी हमेशा सामाजिक कल्याण के प्रति समर्पित रहे और उन्होंने अपने कार्यों से अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
सत्यप्रकाश थपलियाल का जन्म 1936 में पौड़ी गढ़वाल के चिलौली गांव में हुआ था। वे बेहद साधारण परिवार से थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण में कुछ विशेष था। उन्होंने 1972 में शिक्षण सेवा में कदम रखा और 1998 में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके शिक्षण काल में, उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रमों की शुरुआत की।
निर्बलों के लिए उम्मीद की किरण
वह उत्तराखंड साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के संस्थापक थे और उन्होंने स्वरूप में कई साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान थी उनकी गरीब और अनाथ बच्चों के प्रति समर्पण। वे हर साल सौ से अधिक बच्चों के लिए आर्थिक सहायता जुटाते थे।
कोटद्वार स्थित ज्वालपा धाम संस्कृत विद्यालय के प्रबंधक के रूप में, उन्होंने बच्चों के लिए निःशुल्क भोजन व्यवस्था शुरू की। एक घटना जिसके बारे में उन्होंने स्वयं बताया, एक अध्यापक ने एक गरीब बच्चे को डाँट दिया कि उसने भोजनालय का शुल्क नहीं भरा। इसकी शिकायत उन्होंने अपने सांसद से की, जिन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की।
विदाई का पल
उनका अंतिम संस्कार 26 जुलाई को हरिद्वार के चंडीघाट में किया गया। कोटद्वार में उनकी पार्थिव देह के अंतिम दर्शनों के समय पूरा शहर शोक में डूबा हुआ था। उनकी अनुपस्थिति से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि समाज के उन लोगों के लिए भी एक बड़ा खालीपन महसूस होगा जिन्हें उन्होंने हमेशा सहारा दिया।
इस प्रकार, सत्यप्रकाश थपलियाल का निधन निर्बलों के लिए आशा की एक दीवार को तोड़ने का समान था। उनका कार्य और उनकी प्रेरणा सदैव हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। हम उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को वैकुण्ठ लोक में स्थान दें। ॐ शांति। शांति। शांति।
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