संस्कृत भाषा के प्रचार में योगदान: श्री गोवर्धन संस्कृत विद्या मंदिर में संभाषण शिविर का समापन
श्री गोवर्धन संस्कृत विद्या मंदिर में संस्कृत संभाषण शिविर का समापन
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कम शब्दों में कहें तो, श्री गोवर्धन संस्कृत विद्या मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज धर्मपुर ने संस्कृत संभाषण शिविर का सफलतापूर्वक समापन किया। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और ज्ञान की धरोहर को संजोए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
देहरादून। श्री गोवर्धन संस्कृत विद्या मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज, धर्मपुर में संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन संस्कृत संभाषण शिविर का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत बोलने एवं समझने में दक्ष बनाना था, जिससे वे भारतीय संस्कृति को समझ सकें और उसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि और उनके विचार
समापन कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती ने कहा कि “संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे शिविर न केवल उपयोगी हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं।” उनका मानना है कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।
पूर्व राज्य मंत्री सुभाष जोशी ने इस अवसर पर कहा, “संस्कृत भाषा का प्रसार हमारी संस्कृति को मजबूती प्रदान करेगा। जब हम अपनी भाषाओं का सम्मान करेंगे, तो हमारी परंपराओं की जड़ें भी मजबूत होंगी।”
संस्कृत भाषा के विकास हेतु अन्य उपाय
शिविर के सहायक निदेशक डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि इस साल जनपद के विभिन्न संस्थानों में भी संस्कृत संभाषण शिविर आयोजित किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों में इस भाषा के प्रति रुचि बढ़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर स्तर पर संस्कृत भाषा की शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
सामान्य गतिविधियाँ और पुरस्कृत विद्यार्थी
इस शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी सम्मानित किया गया। छात्र दिवाकर को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तथा सबसे कम आयु की प्रतिभागी दिव्या को उनके प्रयासों के लिए विशेष सम्मान दिया गया।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुषमा कुकरेती, प्रधानाचार्य आशुतोष शर्मा, पार्षद विमल उनियाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस आयोजन का संचालन आचार्य अरुण पंत ने किया।
निष्कर्ष
इस 7 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर ने न केवल संस्कृत भाषा के प्रति विद्यार्थियों में रुचि जगाई, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझने और आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी दी। शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के प्रेरणादायक कार्यक्रम आगे भी जारी रहने चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को संरक्षित और समृद्ध कर सके।
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Team Amrita Bazaar Patrika - श्रीमती राधिका श्रीवास्तव
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